MP NEWS:मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने अपनी आगामी परीक्षाओं में फर्जीवाड़े को पकड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का उपयोग करने का निर्णय लिया है। यह कदम राज्य में पिछले कुछ समय में पटवारी भर्ती और शिक्षक भर्ती जैसी परीक्षाओं में उठे विवादों के बाद उठाया गया है
क्यों लिया गया यह निर्णय:पटवारी भर्ती और शिक्षक भर्ती जैसी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों और विवादों ने चयन मंडल को तकनीकी सुधार की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों को रोकने के लिए अब AI माड्यूल के जरिए हर गतिविधि पर सख्त नजर रखी जाएगी
AI तकनीक से होगा परीक्षा प्रक्रिया में सुधार
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने अपनी आगामी परीक्षाओं में सुधार के लिए एक नई प्रणाली की घोषणा की है, जिसमें AI तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इस तकनीक के माध्यम से ऑनलाइन परीक्षाओं में पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की कोशिश की जाएगी।
AI तकनीक द्वारा फर्जीवाड़े की पहचान और परीक्षा के दौरान किसी भी धोखाधड़ी का खुलासा किया जाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि परीक्षाओं में कोई भी असामान्य गतिविधि न हो और परीक्षार्थियों को एक निष्पक्ष माहौल में परीक्षा देने का अवसर मिले।
AI तकनीक कैसे करेगी फर्जीवाड़े का खुलासा
AI तकनीक का उपयोग फर्जीवाड़े का खुलासा करने के लिए अत्यधिक प्रभावी साबित होगा। यह तकनीक पहले से निर्धारित मानकों का पालन करते हुए परीक्षा के दौरान उम्मीदवारों के व्यवहार का विश्लेषण करेगी। इसके तहत चेहरे की पहचान (Face Recognition) की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जो व्यक्ति परीक्षा दे रहा है
वह वही उम्मीदवार है, जिसने आवेदन किया है। इसके अलावा, AI यह भी देखेगा कि परीक्षा में शामिल होने वाला उम्मीदवार किस समय पर किस प्रश्न को हल कर रहा है और कितने समय में जवाब दे रहा है।
नई प्रणाली से क्या होगा लाभ
MPESB द्वारा नई प्रणाली के लागू होने से कई लाभ होंगे। सबसे पहले, यह परीक्षा में फर्जीवाड़े की पहचान करने के लिए एक सशक्त उपाय बनेगा, जिससे परीक्षाओं की पारदर्शिता बढ़ेगी। AI तकनीक के उपयोग से परीक्षा केंद्रों पर होने वाली किसी भी गड़बड़ी की पहचान तुरंत की जा सकेगी।
इसके अलावा, ऑनलाइन परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह से सुरक्षित बनाया जाएगा, ताकि सभी परीक्षार्थियों को एक समान और निष्पक्ष अवसर मिल सके।
एआई का उद्देश्य और भूमिका

MP कर्मचारी चयन मंडल के अधिकारी बताते हैं कि एआई माड्यूल चार प्रकार के डाटा का विश्लेषण करेगा: आवेदन पत्र, चेहरों का मिलान, परीक्षा में दिए गए उत्तरों का समय विश्लेषण, और परीक्षा केंद्रों में असामान्यता की पहचान। एआई का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और किसी भी तरह के फर्जीवाड़े को समय रहते पकड़ना है।
आवेदन पत्रों की स्कैनिंग
पहला कदम होगा आवेदन पत्रों की स्कैनिंग। इस चरण में एआई यह जांचेगा कि कहीं किसी विशिष्ट परीक्षा केंद्र पर आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की संख्या असामान्य तो नहीं है। उदाहरण के लिए, यदि एक विशेष केंद्र पर बहुत अधिक उम्मीदवारों का आवेदन होता है, तो यह संकेत हो सकता है कि वहां कुछ गड़बड़ी हो सकती है। एआई इन असामान्य पैटर्नों की पहचान करेगा, जिससे अधिकारियों को इस पर कार्रवाई करने का मौका मिलेगा।
फेस रिकॉग्निशन तकनीक का उपयोग
दूसरे चरण में, MPESB एआई तकनीक का उपयोग करके परीक्षा के दौरान फेस रिकॉग्निशन (चेहरे की पहचान) तकनीक का इस्तेमाल करेगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि परीक्षा में बैठने वाला व्यक्ति वही है जिसने पंजीकरण कराया है। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई और व्यक्ति उम्मीदवार के स्थान पर परीक्षा न दे रहा हो।
अगर कोई व्यक्ति किसी और के स्थान पर परीक्षा देता हुआ पाया जाता है, तो यह तुरंत पकड़ा जाएगा।
समय विश्लेषण के द्वारा फर्जीवाड़ा पकड़ना
तीसरे चरण में एआई तकनीक द्वारा परीक्षा के दौरान दिए गए उत्तरों का समय विश्लेषण किया जाएगा। यह देखा जाएगा कि हर परीक्षार्थी को किसी विशेष सवाल का उत्तर देने में कितना समय लग रहा है। अगर किसी व्यक्ति को किसी प्रश्न का उत्तर देने में सामान्य से कम या ज्यादा समय लगता है, तो यह संदिग्ध माना जाएगा।
इसके अलावा, अगर सभी उम्मीदवारों को एक जैसे समय में सवाल हल होते हैं, तो भी यह एआई के लिए एक चेतावनी संकेत होगा। इस तरह की गतिविधियों को तुरंत पकड़ने और जांचने के लिए एआई को रेड अलर्ट भेजा जाएगा।
लाइव निगरानी और सीसीटीवी का उपयोग

MPESB द्वारा नई व्यवस्था में एक और अहम बदलाव किया गया है: परीक्षा केंद्रों की लाइव निगरानी। अब परीक्षा केंद्रों पर कैमरे लगाए जाएंगे, जिनकी निगरानी एक कंट्रोल रूम से की जाएगी। यह निगरानी परीक्षा शुरू होने से दो घंटे पहले और समाप्त होने के एक घंटे बाद तक जारी रहेगी।
इससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ा जा सकेगा। इस प्रक्रिया में MPESB द्वारा निगरानी की पूरी जिम्मेदारी एक विशेष एजेंसी को दी जाएगी, जो कैमरों के माध्यम से केंद्रों पर गतिविधियों की 24/7 निगरानी करेगी।
प्रश्न पत्र की सुरक्षा
नई व्यवस्था में परीक्षा शुरू होने से ठीक पांच मिनट पहले प्रश्न पत्र तैयार किया जाएगा। इसके लिए एक प्रश्न बैंक तैयार किया जाएगा, जिसमें 1,000 से अधिक प्रश्न होंगे। AI सॉफ्टवेयर इन्हीं प्रश्नों से परीक्षा के लिए प्रश्न पत्र तैयार करेगा, जिससे पेपर लीक होने की संभावना न के बराबर होगी।
तीन एजेंसियों का गठजोड़
MPESB परीक्षा प्रक्रिया में अब तीन अलग-अलग एजेंसियों का योगदान होगा। एक एजेंसी परीक्षा आयोजित करेगी, दूसरी एजेंसी प्रश्न पत्र तैयार करेगी, और तीसरी एजेंसी एआई तकनीक की निगरानी और विश्लेषण करेगी। इस तीन-एजेंसी मॉडल से परीक्षा प्रक्रिया और अधिक सुरक्षित और पारदर्शी होगी, जिससे फर्जीवाड़े के मामलों को रोकने में मदद मिलेगी।
साइबर सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा
नई व्यवस्था के तहत, MPESB परीक्षा केंद्रों और प्रक्रिया को साइबर सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा के साथ मजबूत बनाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि परीक्षा के दौरान किसी प्रकार की हैकिंग, डाटा चोरी या डिजिटल धोखाधड़ी की घटना न हो। एआई तकनीक का उपयोग डिजिटल सुरक्षा को बढ़ाने के लिए किया जाएगा, ताकि सभी डाटा सुरक्षित और संरक्षित रहें।
बायोमेट्रिक आथेंटिफिकेशन
बायोमेट्रिक आथेंटिफिकेशन भी इस प्रक्रिया का एक हिस्सा होगा। इस तकनीक के माध्यम से उम्मीदवारों की पहचान और उपस्थिति की पुष्टि की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी उम्मीदवार अपने स्थान पर किसी और को न भेजे।
परीक्षा केंद्रों पर उपस्थिति की पुष्टि सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की जाएगी, जो बायोमेट्रिक डिवाइस के जरिए होगी।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) द्वारा एआई का उपयोग परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल फर्जीवाड़े को रोकने में मदद करेगा, बल्कि उम्मीदवारों के लिए एक सुरक्षित और विश्वसनीय वातावरण भी तैयार करेगा।
एआई द्वारा किए जाने वाले समय विश्लेषण, चेहरे की पहचान और अन्य डाटा विश्लेषण तकनीक के माध्यम से अब परीक्षा में कोई भी धांधली पकड़ी जा सकेगी। इसके अलावा, परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी और प्रश्न पत्र की सुरक्षा से परीक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
इस नई व्यवस्था से उम्मीद है कि MPESB की आगामी परीक्षाओं में फर्जीवाड़े की संभावना कम होगी, और परीक्षाएं अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित बनेंगी। यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण हो सकती है, जहां परीक्षाओं में फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी की समस्या आम है। MPESB के इस कदम से उम्मीदवारों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, और उन्हें यह विश्वास होगा कि उन्हें निष्पक्ष और सुरक्षित वातावरण में परीक्षा देने का मौका मिलेगा।
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