Dev Diwali 2024: भारत का एक विशेष धार्मिक पर्व है, जिसे पूरे भक्ति भाव और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इसे विशेष रूप से उत्तर भारत में मान्यता प्राप्त है, खासकर वाराणसी में। माना जाता है कि इस दिन देवताओं ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध करने के उपलक्ष्य में दीये जलाए थे,और तभी से इसे देवताओं की दिवाली या देव दिवाली के नाम से जाना जाता है। यह पर्व भगवान शिव और गंगा नदी से भी जुड़ा हुआ है, जो इसे और अधिक पवित्र बनाता है। इस पवित्र पर्व का विशेष महत्व है और इसका उत्सव लाखों श्रद्धालुओं द्वारा मनाया जाता।
देव दिवाली 2024 कब है तिथि और शुभ मुहूर्त जानें

इस बार देव दिवाली 15 नवंबर 2024 शुक्रवार की शुभ दिन पर मनाई जाएगी शुभ मुहूर्त:
- पूर्णिमा तिथि आरंभ: 15 नवंबर को सुबह 02:36 बजे।
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 16 नवंबर को सुबह 01:54 बजे।
- पूजन का श्रेष्ठ समय: शाम 06:00 बजे से रात 08:00 बजे तक।
इस मुहूर्त में दीपदान और पूजा करने से देवताओं का विशेष आशीर्वाद मिलता है।
देव दिवाली क्यों मनाई जाती है

देव दिवाली का संबंध एक पौराणिक कथा से है। त्रिपुरासुर नामक राक्षस तीनों लोकों में आतंक मचा रहा था। देवताओं के आग्रह पर भगवान शिव ने उसे समाप्त करने का वचन दिया। कार्तिक पूर्णिमा के दिन शिव ने अपने त्रिशूल से त्रिपुरासुर का वध किया। इस विजय को देवताओं ने दिवाली की तरह मनाया, जिससे इसे “देव दिवाली” कहा जाने लगा।
देव दिवाली न केवल अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है, बल्कि यह भक्तों के लिए भगवान शिव और गंगा माता की कृपा प्राप्त करने का एक शुभ अवसर भी है।
देव दिवाली की पूजा विधि संपूर्ण जानकारी

देव दिवाली के दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इसे सही तरीके से करने के लिए निम्नलिखित विधि अपनाएं:
पूजा की सामग्री
- घी के दीपक
- पुष्प (गुलाब, कमल, और बेला)
- गंगा जल
- चंदन और धूप
- बेलपत्र और दीपदान सामग्री
पूजा विधि
- सुबह गंगा स्नान करें, यदि संभव हो। अन्यथा घर पर स्नान के बाद पवित्र जल का छिड़काव करें।
- शिवलिंग पर गंगाजल और बेलपत्र अर्पित करें।
- शाम के समय दीपक जलाएं और देवताओं को समर्पित करें।
- अगर आप वाराणसी में हैं, तो गंगा आरती का हिस्सा बनें।
पूजा करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
देव दिवाली के मुख्य आयोजन वाराणसी से हरिद्वार तक का भव्य उत्सव

वाराणसी: दीपों की रोशनी से सजा गंगा घाट वाराणसी में देव दिवाली का पर्व सबसे भव्य रूप में मनाया जाता है। गंगा घाट पर हजारों दीपक जलाए जाते हैं, जिससे पूरी नदी की चमक दोगुनी हो जाती है। गंगा आरती इस पर्व का मुख्य आकर्षण है।
प्रयागराज और हरिद्वार:प्रयागराज में संगम तट पर श्रद्धालु स्नान कर पवित्रता प्राप्त करते हैं। हरिद्वार में गंगा घाट पर भव्य दीपोत्सव और पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है।
अन्य प्रमुख स्थलअयोध्या: यहां सरयू नदी के किनारे भी दीप जलाए जाते हैं।मथुरा यमुना घाट पर विशेष पूजा होती है।
देव दिवाली का आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश

देव दिवाली का आध्यात्मिक महत्व गहरा है। यह अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है। इसके अलावा, यह पर्व सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है। आजकल लोग मिट्टी के दीपक जलाकर प्रदूषण को रोकने का प्रयास कर रहे हैं।
पर्यावरण संरक्षण:इस पर्व पर दीयों का उपयोग पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी दर्शाता है। प्लास्टिक और कृत्रिम सजावट से बचें और पारंपरिक तरीकों को अपनाएं।
देव दिवाली की आधुनिकता क्यों यह पर्व हर साल खास बनता जा रहा है?
देव दिवाली अब केवल एक धार्मिक पर्व नहीं रह गया है, बल्कि यह पर्यटन का बड़ा केंद्र बन चुका है। वाराणसी में हर साल लाखों पर्यटक आते हैं और गंगा आरती में भाग लेते हैं। इस पर्व के साथ आधुनिक पहलुओं को जोड़ने से इसकी लोकप्रियता बढ़ी है।
इस देव दिवाली पर अपने प्रियजनों को इन शुभकामना संदेशों के माध्यम से पर्व की बधाई दें
- “देव दिवाली की शुभकामनाएं! भगवान शिव का आशीर्वाद आपके जीवन को प्रकाशमय बनाए।”
- गंगा मैया की पवित्र धारा से आपके जीवन से सभी कष्टों को दूर करे। शुभ देव दिवाली!”
- “दीपक जलाएं, खुशियां फैलाएं और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करें। देव दिवाली मंगलमय हो!”
देव दिवाली 2024 का महत्व

देव दीपावली का प्रमुख महत्व भगवान शिव की पूजा में है, क्योंकि इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस को हराया और देवताओं को विजय दिलाई। इस दिन दीप जलाकर अंधकार को दूर किया जाता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और घर में शांति बनी रहती है।
इसके अलावा, गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है, जिससे पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है। देव दीपावली पर जलाए गए दीपकों से वातावरण में शुद्धता और दिव्यता का अहसास होता है। यह पर्व समाज में भाईचारे, एकता और धर्म के प्रति विश्वास को प्रोत्साहित करता है।
निष्कर्ष
देव दिवाली का पर्व एक दिव्य अवसर है, जो हमें बुराई पर अच्छाई की जीत की प्रेरणा देता है। यह पर्व केवल धार्मिकउत्सव नहीं है, बल्कि आंतरिक शुद्धि और सामूहिकता का प्रतीक है। इस पर्व पर दीप जलाना, गंगा स्नान और देवताओंका पूजन हमारे जीवन में सुख-शांति का संचार करता है। देव दिवाली हमें यह भी याद दिलाती है कि हमें हमेशा अच्छाई के मार्ग पर चलना चाहिए और अपनी संस्कृति व परंपराओं का सम्मान करना चाहिए।
इस पावन पर्व पर भगवान शिव और अन्य देवताओं की कृपा से हर व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आए। देव दिवाली की शुभकामनाएं!
प्रश्न: देव दीपावली कब मनाई जाती है?
उत्तर: देव दीपावली कार्तिक पूर्णिमा को मनाई जाती है, जो दीपावली के 15 दिन बाद होती ह
प्रश्न: देव दीपावली का क्या महत्व है?
उत्तर: देव दीपावली भगवान शिव की त्रिपुरासुर पर विजय और अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है।
प्रश्न: देव दीपावली पर कौन सी पूजा की जाती है?
उत्तर: इस दिन भगवान शिव और गंगा माता की पूजा की जाती है और दीप जलाए जाते हैं।
प्रश्न: देव दीपावली पर गंगा स्नान क्यों किया जाता है?
उत्तर: गंगा स्नान से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
प्रश्न: देव दीपावली पर दीप क्यों जलाए जाते हैं?
उत्तर: दीप जलाकर अंधकार को दूर किया जाता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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